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लेखनी प्रतियोगिता -20-Jan-2023

शिवरात्रि

अखण्ड प्रचण्ड रुप तेरा 
असुरो का तू संहारी
जटाओ में तेरे गंगा की धारा
नंदी की है सवारी
तू अविचल तू ही अविनाशी
तू शक्ति तू भक्ति
हे शिव शम्भू कैलाश पति
तुम हुए आज गौरा के 
आई देखो शिवरात्रि

गले में तेरे सर्पों की माला
माथे पर तेरे चाँद निराला
बाघाम्बर का तेरा दुशाला
तू पिए है भांग का प्याला
तू सत्य तू ही अनंत 
तू ही अनादि तू ही अंत 
हे भोले शंकर रूद्र धारी
तुम हुए आज गौरा के 
आई देखो शिवरात्रि

तेरी महिमा है अपार 
तुझसे चले सारा संसार 
तीन नेत्र के तुम हो स्वामी
ओमकार हे कमण्डल 
धारी
तू नटराज तू ही महाकाल 
डमरु धारी त्रिरपुरारी 
हे नीलकंठ हे भोले भण्डारी 
तुम हुए आज गौरा के 
आई देखो शिवरात्रि

आए शरण शिव शंकर हम तेरी 
तू बह्मा तू विष्णु तू ही जगतधारी 
तेरी अनुकम्पा से चले
दुनिया की नैया सारी
तू है खवैया तू ही पालनहारी
हर कण कण में है तेरी गूँज 
हे अर्धनारीश्वर हे शिव भण्डारी 
बेलपत्र दूध से करे हम पूजा तेरी
तुम हुए आज गौरा के 
आई देखो शिवरात्रि

श्वेता दूहन देशवाल मुरादाबाद उत्तर प्रदेश

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9 Comments

Sant kumar sarthi

21-Jan-2023 02:24 PM

शानदार

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Punam verma

21-Jan-2023 08:37 AM

Very nice

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Abhinav ji

21-Jan-2023 07:54 AM

Very nice

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